ट्रैक्टर से जुड़े ये भारीभरकम शब्द समझ नहीं आते है? आइए जानें इन्हें आसान भाषा में।
● इन फीचर्स का मतलब नहीं पता तो खरीद बैठोगे गलत ट्रैक्टर।
जब हमारे किसान भाई नया ट्रैक्टर खरीदने शोरूम पर जाते है या ऑनलाइन ट्रैक्टर के बारे में जानने की कोशिश करते है तो उन्हें कई ऐसे तकनीकी शब्द भी बताए जाते है जो उन्हें समझ नहीं आते। आज हम आपको ऐसे ही कुछ शब्दों का मतलब आसान भाषा में समझाने कि कोशिश कर रहें, जिससे किसान को किसी भी ट्रैक्टर के बारे में बेहतर समझ बन सके। तो आइए जानते है कुछ ऐसे शब्दों के मतलब जो आपने सुने तो बहुत बार होंगे पर उनके मायने क्या होते यह समझ ना आया होगा।
कॉन्स्टेंट मेश - इस शब्द का उपयोग गेयर बॉक्स के संदर्भ में किया जाता है। दरअसल कॉन्स्टेंट मेश ट्रांसमिशन सिस्टम होता है, जिसे सबसे बेहतर तकनीक समझा जाता है। इसके आलावा ट्रैक्टर में स्लाइडिंग मेश ट्रांसमिशन सिस्टम होता है, जिसकी तुलना में कॉन्स्टेंट मेश ट्रांसमिशन लंबे समय तक, बेहतर ढंग से काम करता है।
डुअल क्लच - डुअल क्लच के बारे में आप इतना तो जानते होंगे की यह क्लज का एक प्रकार होता है। हम आपको बता दें डुअल का हिंदी में अर्थ दोहरा होता है। डुअल क्लच सिंगल टाइप क्लच से बेहतर होता है, यह सुचारू रूप से काम करता है। सिंगल और डुअल के अलावा डबल क्लच भी होता है, जिसमें पीटीओ के संचालन के लिए अलग से लीवर होता है। डबल टाइप क्लच को सिंगल टाइप क्लच से बेहतर माना जाता है।
रिवर्स पीटीओ - रिवर्स का हिंदी में अर्थ होता है उल्टा, रिवर्स पीटीओ से तात्पर्य होता है जो पीटीओ इंप्लीमेंट को उल्टी दिशा में भी घुमा सके। इसका यह लाभ की अगर कभी आपका इंप्लीमेंट कहीं फस जाता है और आगे की दिशा में नहीं घूमता तो आप उसे रिवर्स में चला कर बाहर निकाल सकते है।
ऑयल इम्मर्सेड ब्रेक - ऑयल इम्मर्सेड ब्रेक से मतलब होता है तेल में डूबे हुए ब्रेक। यह सबसे बेहतर तकनीक है ब्रेक में, जिससे ब्रेक बिना ख़ास रखरखाव के सालो साल तक सुचारू काम करते है।
व्हील बेस - आपको पहले बता दें ट्रैक्टर व्हील बेस क्या होता है, व्हील बेस दरअसल ट्रैक्टर के आगे के टायर से लेकर पिछले के टायर तक की लंबाई को कहा जाता है जो एमएम में होता है। इसका असर ट्रैक्टर पर यह होता है कि इससे ट्रैक्टर को ज्यादा संतुलन मिलता है ट्रैक्टर आगे से उठता नहीं है। ज्यादा व्हील बेस का अर्थ है ज्यादा संतुलन पर व्हील बेस को ज्यादा भी नहीं रख सकते, क्योंकि अगर व्हील बेस ज्यादा हुआ ट्रैक्टर को मोड़ने में दिक्कत होगी मोड़ने के लिए ज्यादा जगह चाहिए होगी। मोड़ने के लिए कितनी जगह चाहिए होगी इसका अनुमान आप ट्रैक्टर की टर्निंग रेडियस से पता लगा सकते है जिसे भी एमएम में नापा जाता है।
ग्राउंड क्लीयरेंस- ट्रैक्टर के सबसे नीचे के हिस्से (टायर के अलावा) से लेकर जमीन तक की दूरी को ग्राउंड क्लीयरेंस कहते है, अगर ग्राउंड क्लीयरेंस कम होगा तो ट्रैक्टर के किसी अर्चन में फंसने की संभावना होती है।
तो यह थे कुछ ऐसे शब्द जिनका ट्रैक्टर के संदर्भ में अधिक उपयोग होता है। इसके अलावा भी कंपनियां कई प्रकार के भारी भरकम शब्दों का उपयोग करती है, इनका मतलब जाने बगैर ट्रैक्टर के बारे में राय ना बनाए। अगर आपको किसी ट्रैक्टर से जुड़े फीचर का मतलब समझ नहीं आता तो ट्रैक्टर की जानकारी ट्रैक्टर ज्ञान कि यूट्यूब वीडियो या वेबसाइट ले, जहां बिल्कुल आसान भाषा के ट्रैक्टर के फीचर समझाए जाते है। ट्रैक्टर और किसानी से जुड़ी अन्य जानकारियों के लिए भी ट्रैक्टर ज्ञान से जुड़े रहें।
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